Friday, May 18, 2012

  चलते-चलते

 हर बार चलते-चलते, जब कभी पीछे मुड़ कर देखती हूं,
 बस एक ही ख्वाइश होती है, कि तुम एक बार कह दो आगे बढ़ो मैं यहीं हूं,

जाने कैसे काट लिया इतना लंबा सफर बस चलते-चलते
और आज हर पल, यही लग रहा है कि मैं कहां हूं

 हर बार चलते-चलते, जब आगे राह ना दिखती,
तो ऐसा लगता है , तुम हो,  अगर मैं आगे ना बढ़ पाउं तो मुझे थामने को
आगे बढ़ना है

एक बार फिर इक नई उड़ान ली है मैंने, ना रास्‍ते का पता है ना ही मंजि़ल का,

बस भरोसा है मुझे कि इस सही दिशा में चलते जाना है,

आंधी आये, तूफा आये या बदल जाये ये दुनिया ,

मुझे तो बहुत कुछ नया सीखना है और बहुत आगे बढ़ना है