Thoughts becomes words,words become action,action determines character and character decides destiny.
Tuesday, May 29, 2012
Wednesday, May 23, 2012
यूं स्वागत करें मानूसन का
ऋतुओं में सबसे खास है वर्षा ऋतु। चाहे आप किसी भी उम्र के हों, इस मौसम में घूमने, खेलने का आनंद लेने से आप नहीं चूंकते। इसके लिए आपको शिक्षक की या बास की डांट की क्यों ना खानी पड़े। ऐसे में सुबह, दोपहर या शाम की बाध्यसता नहीं होती। जब जी किया बारिश का मज़ा लेने निकल पड़े।
लेकिन आपकी यह मौज मस्ती आपपर भारी भी पड़ सकती है। इसका अर्थ यह तो नहीं कि आप ऐसे लुभावने मौसम का मजा़ नहीं लेंगे। वातावरण में हो रहे बदलाव के कारण मच्छकरों, मक्खिेयों और कीटाणुओं की संख्याग के बढ़ने की वजह से संक्रामक बीमारियों के होने की सम्भाेवना भी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए भी होता है क्यों कि इस मौसम में सबसे आम प्रकार की बीमारियां दूषित आहार के सेवन से या मच्छीरों के काटने से होती हैं।
वर्षा ऋतु में फिट रहने के टिप्से :
• अगर सड़क के किनारे की पानी पुरी, चाट या चटपटे व्यंकजन देखकर आपके मुंह में पानी आता है, तो सम्भपल जायें। यह समय मन को नियंत्रित करने का है। ऐसे में पानी और कच्चे फलों के द्वारा होने वाला संक्रमण बहुत ही समान्यं है।
• मच्छ रों को घर से दूर रखने के लिए मास्कीनटो रीपेलेंट ज़रूर लगायें।
• अगर आपके पैर गीले हो जाते हैं, तो उन्हेंा ठीक प्रकार से सुखाने के बाद ही जूते पहनें।
• गीले कपड़ों या बालों को सुखाकर ही एयर कंडीशन कमरे में जायें।
• अगर आपको अस्थामा या डायबिटीज़ है, तो ऐसी जगहों पर ना जायें जहां पर फंगस लगे हो।
• बारिश के मौसम में बुखार, फ्लू, बैक्टी रिया, वायरस और फंगस के कारण होने वाली बीमारियों के साथ ही प्रतिरोधी क्षमता कम़जोर हो जाती है इसलिए टायफायड, डायरिया और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
• स्वटच्छ आहार के सेवन के साथ–साथ पानी का स्व च्छ होना भी अत्यकधिक आवश्यरक है ।
• अल्कोइहल, चाय और काफी के सेवन से शरीर में पानी की कमी होती है इसलिए इनका सेवन कम करें।
ऐसे वातावरण में आहार के कारण होने वाली बीमारियों की सम्भाावना अधिक रहती है इसलिए स्वनस्थव आहार लें और पर्याप्त मात्रा में पेय ज़रूर लें।
ऋतुओं में सबसे खास है वर्षा ऋतु। चाहे आप किसी भी उम्र के हों, इस मौसम में घूमने, खेलने का आनंद लेने से आप नहीं चूंकते। इसके लिए आपको शिक्षक की या बास की डांट की क्यों ना खानी पड़े। ऐसे में सुबह, दोपहर या शाम की बाध्यसता नहीं होती। जब जी किया बारिश का मज़ा लेने निकल पड़े।
लेकिन आपकी यह मौज मस्ती आपपर भारी भी पड़ सकती है। इसका अर्थ यह तो नहीं कि आप ऐसे लुभावने मौसम का मजा़ नहीं लेंगे। वातावरण में हो रहे बदलाव के कारण मच्छकरों, मक्खिेयों और कीटाणुओं की संख्याग के बढ़ने की वजह से संक्रामक बीमारियों के होने की सम्भाेवना भी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए भी होता है क्यों कि इस मौसम में सबसे आम प्रकार की बीमारियां दूषित आहार के सेवन से या मच्छीरों के काटने से होती हैं।
वर्षा ऋतु में फिट रहने के टिप्से :
• अगर सड़क के किनारे की पानी पुरी, चाट या चटपटे व्यंकजन देखकर आपके मुंह में पानी आता है, तो सम्भपल जायें। यह समय मन को नियंत्रित करने का है। ऐसे में पानी और कच्चे फलों के द्वारा होने वाला संक्रमण बहुत ही समान्यं है।
• मच्छ रों को घर से दूर रखने के लिए मास्कीनटो रीपेलेंट ज़रूर लगायें।
• अगर आपके पैर गीले हो जाते हैं, तो उन्हेंा ठीक प्रकार से सुखाने के बाद ही जूते पहनें।
• गीले कपड़ों या बालों को सुखाकर ही एयर कंडीशन कमरे में जायें।
• अगर आपको अस्थामा या डायबिटीज़ है, तो ऐसी जगहों पर ना जायें जहां पर फंगस लगे हो।
• बारिश के मौसम में बुखार, फ्लू, बैक्टी रिया, वायरस और फंगस के कारण होने वाली बीमारियों के साथ ही प्रतिरोधी क्षमता कम़जोर हो जाती है इसलिए टायफायड, डायरिया और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
• स्वटच्छ आहार के सेवन के साथ–साथ पानी का स्व च्छ होना भी अत्यकधिक आवश्यरक है ।
• अल्कोइहल, चाय और काफी के सेवन से शरीर में पानी की कमी होती है इसलिए इनका सेवन कम करें।
ऐसे वातावरण में आहार के कारण होने वाली बीमारियों की सम्भाावना अधिक रहती है इसलिए स्वनस्थव आहार लें और पर्याप्त मात्रा में पेय ज़रूर लें।
Friday, May 18, 2012
चलते-चलते
हर बार चलते-चलते, जब कभी पीछे मुड़ कर देखती हूं,
बस एक ही ख्वाइश होती है, कि तुम एक बार कह दो आगे बढ़ो मैं यहीं हूं,
जाने कैसे काट लिया इतना लंबा सफर बस चलते-चलते
और आज हर पल, यही लग रहा है कि मैं कहां हूं
हर बार चलते-चलते, जब आगे राह ना दिखती,
तो ऐसा लगता है , तुम हो, अगर मैं आगे ना बढ़ पाउं तो मुझे थामने को
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