
कभी जि़दगी किसी की
पैसे कमाने का ज़रिया बना जाती है
तो कभी मौत भी
किसी ज़रिये से कम ना होती
चलते जाते हैं
जाने कितने किन दिशाओं में
आ जाती है सांझ जि़दगी की
पैसे का ज़रिया तलाशते
जुडे हैं जाने कितने रिश्ते
इस जहां में,,
टूटते हैं जाने कितने रिश्ते
सिर्फ पैसे का ज़रिया तलाशते